
अकबरपुर में क्लीनिक के नाम पर चल रहा था अस्पताल
जिला प्रशासन ने की सख्त कार्रवाई
मरीजों की जान से हो रहा था खिलवाड़
चार गंभीर मरीज जिला अस्पताल रेफर
अंबेडकरनगर । जिले के अकबरपुर नगर में मंगलवार को जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने एक निजी अस्पताल पर छापा मारकर उसे सील कर दिया। इस अस्पताल को क्लीनिक के नाम पर संचालित किया जा रहा था और वहां अवैध रूप से सर्जरी की जा रही थी। शिकायत मिलने पर प्रशासन हरकत में आया और मौके पर पहुँचकर कार्रवाई की। इस दौरान अस्पताल में भर्ती चार मरीजों को तत्काल जिला अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। मामले में अस्पताल संचालक को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है।
शहर के बसखारी मार्ग पर स्थित इस अस्पताल के खिलाफ स्थानीय लोगों द्वारा स्वास्थ्य विभाग को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। आरोप था कि बिना उचित अनुमति के वहां बड़े ऑपरेशन किए जा रहे थे। मंगलवार को जब जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया, तो पाया कि अस्पताल में चार मरीज भर्ती थे, जिनमें से कुछ की हाल ही में सर्जरी की गई थी।
छापेमारी का नेतृत्व एसडीएम सदर सौरभ शुक्ल ने किया। उनके साथ अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. रामानंद सिद्धार्थ और डॉ. आशुतोष सिंह भी मौजूद थे। टीम ने अस्पताल के दस्तावेजों की जांच की, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि अस्पताल ने केवल क्लीनिक संचालन के लिए पंजीकरण कराया था। अस्पताल को सर्जरी या बड़े चिकित्सा कार्यों की अनुमति नहीं थी।
छापेमारी के दौरान बसखारी की प्रमिला, ताजपुर के धर्मराज, बसौड़ी की लालमति और मिर्जापुर अकबरपुर की मुद्रिका यादव को गंभीर हालत में पाया गया। इन मरीजों का ऑपरेशन हाल ही में हुआ था और उनकी स्थिति चिंताजनक थी। एसडीएम सदर ने तत्काल एंबुलेंस बुलवाकर चारों मरीजों को जिला अस्पताल भेजा और उनके उचित इलाज के निर्देश दिए।
अस्पताल में कोई प्रशिक्षित चिकित्सक या पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद नहीं था, जिससे यह साबित हुआ कि मरीजों की जान को जोखिम में डालकर अवैध रूप से सर्जरी की जा रही थी। जिला प्रशासन ने अस्पताल संचालक को मौके पर ही हिरासत में ले लिया और उसे अकबरपुर कोतवाली भेज दिया गया। फिलहाल संचालक से पूछताछ जारी है।
प्रशासन ने अस्पताल को खाली करवा कर सील कर दिया है। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है और प्रशासन ने साफ किया है कि जिले में बिना उचित अनुमति के चलने वाले किसी भी चिकित्सा संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा।






